(उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद — UP Board पाठ्यक्रम, व्याख्या व उदाहरण सहित)
अध्याय 1: वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers)
इस अध्याय में संख्याओं के गुणनखंडन (factorisation) तथा अपरिमेय संख्याओं (irrational numbers) की प्रकृति
का अध्ययन किया जाता है — यह आगे के बीजगणित की नींव है।
यूक्लि ड विभाजन एल्गोरिथ्म (Euclid's Division Lemma)
किन्हीं दो धनात्मक पूर्णांकों a और b (a>b) के लिए a = bq + r के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ 0 ≤ r <
b। इसी का प्रयोग करके HCF ज्ञात किया जाता है।
● HCF ज्ञात करने की विधि: बड़ी संख्या को छोटी से भाग दें , फिर भाजक को शेषफल से भाग दें — जब तक
शेषफल 0 न आ जाए
● अंतिम अशून्य भाजक ही HCF होता है
उदाहरण: यूक्लि ड एल्गोरिथ्म से 96 औ र 404 का HCF ज्ञ ात कीजिए।
1. 404 = 96×4 + 20
2. 96 = 20×4 + 16
3. 20 = 16×1 + 4
4. 16 = 4×4 + 0 — शेषफल 0 आ गया
5. अतः HCF = 4
अंकगणित की आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic)
प्रत्येक संयुक्त संख्या को अभाज्य संख्याओ ं के गुणनफल के रूप में एक अद्वितीय (unique) तरीके से लिखा जा
सकता है (क्रम को छोड़कर)। इसी सिद्धांत से HCF-LCM तथा अपरिमेय संख्याओ ं की सिद्धि की जाती है।
● HCF × LCM = दोनों संख्याओ ं का गुणनफल (केवल दो संख्याओ ं के लिए)
● √2, √3, √5 आदि अपरिमेय संख्याएँ हैं — इन्हें विरोधाभास विधि (contradiction) से सिद्ध किया जाता
है
● सांत या पुन रावर्ती दशमलव प्रसार = परिमेय संख्या; असांत-अपुनरावर्ती = अपरिमेय संख्या
ं ा है।
उदाहरण: सिद्ध कीजिए कि √2 एक अ परिमेय स ख्य
1. मान लें √2 परिमेय है, तो √2 = p/q (जहाँ p,q सहअभाज्य पूर्णांक हैं, q≠0)
2. दोनों ओर वर्ग करें: 2 = p²/q² ⇒ p² = 2q² — अतः p² सम है, इसलिए p भी सम है
3. मान लें p = 2m, तो 4m² = 2q² ⇒ q² = 2m² — अतः q भी सम है
4. परंतु p और q दोनों सम होने से वे सहअभाज्य नहीं रह सकते — यह विरोधाभास है
5. अतः हमारी मान्यता गलत थी, √2 अपरिमेय है
अध्याय 2: बहुपद (Polynomials)
बहुपद एक ऐसी बीजगणितीय अभिव्यक्ति है जिसमें चर की घातें ऋणात्मक नहीं होतीं। इस अध्याय में बहुपद के शून्यक
(zeroes) तथा उसके गुणांकों के बीच संबंध पढ़ा जाता है।
, बहुपद के शून्यक
बहुपद p(x) का शून्य क वह मान है जिस पर p(x) = 0 होता है। ग्राफ पर बहुपद के शून्य क वहीं होते हैं जहाँ वक्र x-
अक्ष को काटता है।
● रैखिक बहुपद (degree 1) का 1 शून्य क होता है
● द्विघात बहुपद (degree 2) के अधिकतम 2 शून्य क होते हैं
● त्रिघात बहुपद (degree 3) के अधिकतम 3 शून्य क होते हैं
शून्यकों और गुणांकों में संबध
ं
द्विघात बहुपद ax²+bx+c के लिए यदि α, β शून्य क हों तो इनका योग व गुणनफल गुणांकों से सीधे जुडा़ होता है:
● शून्य कों का योग: α + β = −b/a
● शून्य कों का गुणनफल: α × β = c/a
● त्रिघात बहुपद ax³+bx²+cx+d के लिए: α+β+γ = −b/a, αβ+βγ+γα = c/a, αβγ = −d/a
उदाहरण: यदि द्विघात ब हुपद x²−3x−4 के शून्य क α, β हों तो α+β तथा αβ ज्ञ ात कीजिए।
1. यहाँ a=1, b=−3, c=−4
2. α+β = −b/a = −(−3)/1 = 3
3. αβ = c/a = −4/1 = −4
अध्याय 3: दो चरों वाले रैखिक समीकरण युग्म (Pair of Linear Equations in
Two Variables)
जब दो चरों (जैसे x, y) में दो समीकरण एक साथ दिए जाएँ , तो उन्हें एक साथ हल करके x और y के मान ज्ञात करना इस
अध्याय का मुख्य उद्देश्य है।
हल की प्रक
ृ ति (ग्राफीय विधि से)
दो रैखिक समीकरणों को रेखाओ ं के रूप में दे खा जाए तो उनके प्रतिच्छे दन से हल की प्रक
ृ ति पता चलती है:
● यदि a₁/a₂ ≠ b₁/b₂ हो तो रेखाएँ एक बिंदु पर काटती हैं — अद्वितीय हल (consistent)
● यदि a₁/a₂ = b₁/b₂ = c₁/c₂ हो तो रेखाएँ संपाती (coincident) हैं — अनंत हल
● यदि a₁/a₂ = b₁/b₂ ≠ c₁/c₂ हो तो रेखाएँ समांतर हैं — कोई हल नहीं (inconsistent)
बीजगणितीय विधियाँ
समीकरण युग्म को हल करने के लिए तीन मुख्य बीजगणितीय विधियाँ प्रयोग होती हैं:
● प्रतिस्थापन विधि (Substitution): एक समीकरण से एक चर को दूसरे के रूप में निकालकर दूसरे
समीकरण में रखें
● विलोपन विधि (Elimination): दोनों समीकरणों को इस प्रकार गुणा करें कि एक चर के गुणांक बराबर हो
जाएँ, फिर घटाएँ/जोड़ें
● क्रॉस-गुणन विधि (Cross-multiplication): सीधे सूत्र से x और y ज्ञात करना
उदाहरण: हल कीजिए: 2x+3y=11 तथा 2x−4y=−24
1. दोनों समीकरण घटाने पर: (2x+3y) − (2x−4y) = 11−(−24)
2. 7y = 35 ⇒ y = 5
3. y=5 को पहले समीकरण में रखें: 2x+15=11 ⇒ 2x=−4 ⇒ x=−2
4. अतः x=−2, y=5