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Examen

Test (elaborations) Hindi

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Exam of 2 pages for the course Hindi at Fourth year / 10th Grade (Que ans)

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एक कहानी यह भी (मन्नू भंडारी)

प्रश्न 1 . लेखिका के व्यखित्व पर खकन – खकन व्यखियों का खकस रूप में प्रभाव था ?

उत्तर – लेखिका के जीवन में उनके खपता और उनकी खहदिं ी की अध्याखपका शीला अग्रवाल का खवशेष प्रभाव रहा।
एक और जहािं लेखिका के खपता के व्यवहार व खवचारों ने उनके मन को हीन भावना से भर खदया, खजसका असर ताउम्र उनकी खजिंदगी पर रहा। मान , सम्मान , प्रखसखि पाने के बाद भी वो उस
हीन भावना से उबर नहीं पाई। वहीं दसू री ओर अपने खपता के कारण ही उनके मन में देश प्रेम की भावना ने जन्म खलया और उनमें साखहत्य के प्रखत लगाव बढ़ा।
उनकी खहदिं ी की अध्याखपका शीला अग्रवाल ने उनका पररचय “साखहत्य की दखु नया” से कराया। उन्होने लेखिका के के वल पढ़ने को चनु ाव करके पढ़ने में बदला । उन्होंने प्रखसि लेिकों की
खकताबें पढ़ने को देकर लेखिका को साखहत्य जगत में कदम रिने को प्रेररत खकया और उनके िोए हुए आत्मखवश्वास को पनु ः वापस खदलाया। साथ ही साथ स्वतत्रिं ता आदिं ोलन में भाग लेने को
भी प्रेररत खकया। खजस कारण लेखिका ने आजादी के आदिं ोलन में बढ़ – चढ़कर खहस्सा खलया।

प्रश्न 2 . इस आत्मकथ्य में लेखिका के खपता द्वारा रसोई को “भखियारिाना” कहकर क्यों सिंबोखित खकया है ?

उत्तर – लेखिका के खपता का मानना था खक रसोई के कामकाज करना याखन अपनी क्षमता व प्रखतभा को रसोई की भट्टी में झोंकना। वो समझते थे खक पढ़ने – खलिने की उम्र में लड़खकयों का पूरा
समय रसोई के कामकाज करने व िाना बनाने में ही खनकल जाता है। पाक कला में खनपुण होने के चक्कर में वो अपनी प्रखतभा का पूरा उपयोग नहीं कर पाती हैं। इसीखलए वो रसोईघर को
“भखियारिाना” कहते थे। दरअसल भखियारिाना वह जगह होती है जहािं बहुत बड़ी भट्ठी जलती है ।

प्रश्न 3 . वह कौन सी घिना थी खजसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आि
िं ों पर खवश्वास हो पाया और न ही अपने कानों पर ?

उत्तर – एक बार लेखिका के कॉलेज की खप्रिंखसपल ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक काररवाई करने हेतु उनके खपता को पत्र भेजकर कॉलेज में बुलाया। पत्र पढ़ते ही खपता को क्रोि आना
स्वाभाखवक था । इसीखलए वो गुस्से में भनु भनु ाते हुए कॉलेज पहुचिं गए।
कॉलेज पहुचिं कर जब खप्रखिं सपल ने उन्हें बताया खक उनकी बेिी कॉलेज की लड़खकयों की लीडर बन चक
ु ी है और अब वह जैसा कहती हैं कॉलेज की सभी लड़खकयों वैसा ही करती हैं। उसके एक
इशारे पर कॉलेज की सभी लड़खकयािं अपनी – अपनी कक्षाओ िं को छोड़कर बाहर मैदान में जाकर नारे लगाने लगती हैं। इस बात से खप्रखिं सपल काफी परे शान थी। इसीखलए वह लेखिका के
खिलाफ अनुशासनात्मक काररवाई करना चाहती थी।
लेखकन खपता तो अपनी बेिी का रौब – रुआब व प्रखसखि देिकर गदगद हो गए । अब उन्हें अपनी बेिी से कोई खशकायत नहीं थी। इसीखलए जब वो वापस घर पहुचिं े तो काफी िश ु थे। उन्होने
लेखिका की बहुत तारीफ भी की । लेखिका को इस सब पर खवश्वास ही नहीं हुआ।

प्रश्न 4 . लेखिका की अपने खपता से वैचाररक िकराहि को अपने शब्दों में खलखिए ?

उत्तर – लेखिका के अपने खपता से वैचाररक मतभेद थे। खजस कारण उनका आपस में अक्सर िकराव चलता रहता था।
1) लेखिका के खपता मखहला – खशक्षा व आजादी से जीवन जीने के पक्षिर थे लेखकन उस आजादी का दायरा घर की चारदीवारी या पास – पड़ोस तक ही सीखमत था। जबखक लेखिका िलु े
खवचारों की मखहला थी।
2) लेखिका ने स्वतिंत्रता सिंग्राम में बढ़ चढ़कर खहस्सा खलया । वो हड़तालें करवाती , लड़कों के साथ रैखलयों में शाखमल होती , भाषणबाजी करती , नारे लगवाती थी , जो उनके खपता को
खबल्कुल पसिंद नहीं था।
3) उनके खपता का उनकी माता के साथ बहुत अच्छा व्यवहार नहीं था। वो बात – बात पर उन पर क्रोि करते थे जो लेखिका को खबल्कुल पसिंद नहीं था।
4) काला रिंग होने के कारण लेखिका के खपता लेखिका पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे, खजस वजह से उनके अिंदर हीन भावना ने जन्म खलया।
5) लेखिका के खपता मानते थे खक 16 वषर व मैखिक पास होने के बाद लड़खकयों की शादी कर देनी चाखहए। जबखक लेखिका पढ़ – खलि कर अपने पैरों पर िड़ा होना चाहती थी।

प्रश्न 5 . इस आत्मकथ्य के आिार पर स्वािीनता आिंदोलन के पररदृश्य का खचत्रण करते हुए उसमें मन्नु जी की भखू मका को रे िािंखकत कीखजए ?

उत्तर – सन 1946 – 47 में जब परू े देश में “भारत छोड़ो आदिं ोलन” अपने चरम में था। हड़तालों , जुलूसों व प्रभात फे ररयों के माध्यम से देश का हर व्यखि इस आिंदोलन में अपना
योगदान दे रहा था। ऐसे में लेखिका भी मखहलाओ िं के खलए बनाए गए समाज के सभी खनयम कानूनों को तोड़कर पूरे जोश और उत्साह के साथ स्वतिंत्रता आदिं ोलन में कूद पड़ी। उनकी खहन्दी
अध्याखपका की बातों ने उनकी रगों में बहने वाले लहू को लावे में बदल खदया था । वो भाषणबाजी करती , लड़कों के साथ गली , मोहल्ले व शहर – शहर जाकर हड़तालें करवाती , नारे
लगाती थी। उन्होंने भारत के स्वतिंत्रता आदिं ोलन में अपनी सखक्रय भखू मका खनभाई।

प्रश्न 6 . लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ खगल्ली – डिंडा तथा पतिंग उड़ाने जैसे िेल भी िेले। खकिंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक ही सीखमत था। क्या
आज भी लड़खकयों के खलए खस्थखतयािं ऐसी ही है या बदल गई है। अपने पररवेश के आिार पर खलखिए ?

उत्तर – लेखिका को अपने घर में पढ़ने व िेलने की पूरी आजादी थी। लेखकन उनके खपता द्वारा इस आजादी की भी एक सीमा तय कर दी गई थी, जो घर की चारदीवारी से पास – पड़ोस या
मोहल्ले तक ही सीखमत थी। लेखकन अब समय बदल गया है। और समय के साथ लोगों के खवचारों में भी पररवतरन आया है। आज लड़कों की तरह ही लड़खकयािं भी घर से बाहर खनकल कर
खशक्षा ग्रहण कर रही हैं। आज लड़खकयािं अपने मनपसिंद क्षेत्रों को चनु कर अपनी कायर क्षमता व प्रखतभा का लोहा परू ी दखु नया से मनवा रही हैं । ये लड़खकयािं खसफर अपने शहर या अपने देश तक
ही सीखमत नहीं हैं। बखल्क खवदेशों में भी बहुत ही कुशलता पूवरक काम कर रही हैं। लेखकन भारत में आज भी कुछ ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं जहािं पर लोग अभी भी पुरानी खवचारिारा के हैं। वो आज भी
मखहलाओ िं की आजादी व उनकी खशक्षा के बहुत अखिक पक्षिर नहीं हैं। उन क्षेत्रों में मखहलाएिं आज भी अपने घर या गािंव तक ही सीखमत हैं।

Información del documento

Año escolar
4
Subido en
11 de mayo de 2025
Número de páginas
2
Escrito en
2024/2025
Tipo
Examen
Contiene
Preguntas y respuestas
$10.99

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